Not known Factual Statements About 3. Shabar Dhan–Samriddhi Mantra
वासुकीमुखी नागिनी मंत्र : नागिनी को सिद्ध करने की और प्रसन्न...
वशीकरण और सुरक्षा: शाबर मंत्रों का उपयोग वशीकरण और आत्म-सुरक्षा के लिए किया जाता है।
ऊँ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंहवाहिनी बीसहस्ती भगवती रत्नमण्डित सोनन की माल ।
तेल, सुगन्ध, साबुन, पाउडर आदि का उपयोग न करें।
तीर पतर लियो हाथ, चौसठ जोगनिया खेले पास।
मंत्र नियम : मंत्र-साधना में विशेष ध्यान देने वाली बात है- मंत्र का सही उच्चारण। दूसरी बात जिस मंत्र का जप अथवा अनुष्ठान करना है, उसका अर्घ्य पहले से लेना चाहिए। मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखा जाए। प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है। किसी विशिष्ट सिद्धि के लिए सूर्य अथवा चंद्रग्रहण के समय किसी भी नदी में खड़े होकर जप करना चाहिए। इसमें किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है। जप का दशांश हवन करना चाहिए और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराना चाहिए।
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मंत्र सिद्ध होने पर क्या होता है : मंत्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है, मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है और मंत्र से किसी यक्षिणी और यक्ष को भी साधा जाता है। मंत्र जब सिद्ध हो जाता है तो उक्त मंत्र को मात्र तीन बार पढ़ने पर संबंधित मंत्र से जुड़े देवी, देवता या अन्य कोई आपकी मदद के लिए उपस्थित हो जाते हैं।
साधना के लिए एक निश्चित समय और स्थान का पालन करें।
हम इस वेबसाइट पर अपने साधको को साधना सिखाने के लिए बहुत महेनत करके पोस्ट लिखते हे क्योकि यहाँ जो मंत्र और विधि बताई जाती हे वो सटीक होती हे हमारी more info पोस्ट आप भक्तो को और साधको को अच्छी लगे तो आप हमें हमारे निचे दिए गई स्केनर पर अपना अनुदान कर सकते हे ताकि हमें काम करने में प्रोत्साहन मिले और आगे हम आपके लिए सेवा कर सके!!
इस तरह साधक शाबर मंत्र साधना करके इस मंत्र को सिद्ध कर सकता हे और किसीकी परेशानी को दूर कर सकता हे,मेरा सभी साधक मित्रो से बस यही कहना हे की कोई भी साधना करो पर किसी व्यक्ति के भले काम के लिए उस साधना का इस्तेमाल करना चाहिए अगर किसीका बुरा करोगे तो खुद आपका बुरा होगा,किसीका अच्छा ना कर सको तो कुछ नहीं पर किसीका बुरा मत करना बस आप साधक मित्रो से मेरा यही ही निवेदन हे.
जप काल में भोग आदि सामग्री, फल-फूल, मिठाई आदि ताजा एवं शुद्ध होनी चाहिए।
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भोजन और आहार में संयम:- साधना के दौरान मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का त्याग करें। सात्विक आहार ग्रहण करें।